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दूसरी शादी के लिए कुंडली मिलान – प्रक्रिया और महत्व

दूसरी शादी के लिए कुंडली मिलान – प्रक्रिया और महत्व

✏️ Written by Acharya Rajesh Gupta · Experience: 19 years · ★★★★★
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दूसरे विवाह के लिए कुंडली मिलान – जानें प्रक्रिया और ज्योतिषीय मार्गदर्शन

दूसरा विवाह एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण निर्णय होता है। पहले विवाह के अनुभव और जीवन की परिस्थितियों के कारण व्यक्ति अपने दूसरे जीवनसाथी का चयन सोच-समझकर करता है। ज्योतिष शास्त्र में कुंडली मिलान केवल पहले विवाह के लिए ही नहीं, बल्कि दूसरे विवाह के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस ब्लॉग में हम विस्तार से बताएंगे कि दूसरे विवाह के लिए कुंडली मिलान कैसे किया जाता है और इसके क्या प्रमुख पहलू होते हैं। साथ ही, आप Duastro की फ्री कुंडली से अपनी कुंडली का विश्लेषण कर सकते हैं।

1. दूसरे विवाह में कुंडली मिलान क्यों जरूरी है?

दूसरे विवाह में कुंडली मिलान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:

  • पहले विवाह की असफलता के कारण ग्रहों की स्थिति और मानसिक प्रभाव महत्वपूर्ण होते हैं।
  • दूसरे विवाह में मानसिक स्थिरता और भावनात्मक सामंजस्य सुनिश्चित करना आवश्यक है।
  • शादी के बाद आर्थिक, स्वास्थ्य और संतान संबंधी योगों का विश्लेषण करना जरूरी होता है।

2. मुख्य ज्योतिषीय पहलू

दूसरे विवाह के लिए कुंडली मिलान करते समय कुछ विशेष पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है:

  • सप्तम भाव का मिलान: सप्तम भाव विवाह और जीवनसाथी से संबंधित होता है। इसकी स्थिति दूसरे विवाह के लिए भी निर्णायक होती है।
  • शुक्र और मंगल की स्थिति: शुक्र प्रेम और विवाह का कारक है जबकि मंगल ऊर्जा और सामंजस्य का प्रतीक है। इनकी स्थिति विशेष ध्यान मांगती है।
  • राहु और केतु का प्रभाव: पहले विवाह की समाप्ति के कारण राहु और केतु की दशा का विश्लेषण आवश्यक है। यह नए संबंध में बाधाओं को दर्शा सकता है।
  • ग्रह योग और दोष: विवाह को स्थायी बनाने के लिए ग्रह योगों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।

3. दूसरे विवाह के लिए कुंडली मिलान की प्रक्रिया

कुंडली मिलान में विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण किया जाता है, जैसे:

  • मंगल दोष का परीक्षण – मंगल दोष होने पर उपायों के माध्यम से इसे कम करना आवश्यक होता है।
  • गुण मिलान – जीवनसाथी के स्वभाव, मानसिकता और रुचियों का मिलान करना।
  • दशा और अंतर्दशा का विश्लेषण – यह निर्धारित करता है कि विवाह के लिए अनुकूल समय कब है।
  • सात फेक्टर्स (विवाह योग) – वर और वधू की कुंडली में 7 मुख्य कारकों का मिलान करना।

4. दूसरे विवाह में विशेष सावधानियाँ

पहले विवाह के अनुभव के कारण कुछ विशेष सावधानियाँ अपनाना जरूरी है:

  • भावनात्मक सामंजस्य – भावनाओं का संतुलन सुनिश्चित करना।
  • सामाजिक और पारिवारिक स्थिति – नए संबंध के सामाजिक प्रभावों का विश्लेषण।
  • पूर्व अनुभव से सीख – पिछले अनुभवों से उत्पन्न भावनाओं और बाधाओं को समझना।
  • ज्योतिषीय उपाय – ग्रहों की अशुभ स्थिति को सुधारने के उपाय करना।

5. ज्योतिषीय उपाय और मार्गदर्शन

दूसरे विवाह में सफलता और स्थिरता के लिए कुछ उपाय अपनाए जा सकते हैं:

  • शुक्र और मंगल की स्थिति सुधारने के लिए रत्न धारण
  • सप्तम भाव और विवाह भाव के लिए हवन और पूजा
  • राहु या केतु के प्रभाव को कम करने के लिए विशेष मंत्र जाप
  • जन्म कुंडली का व्यक्तिगत विश्लेषण कर उचित उपाय करना

6. व्यक्तिगत ज्योतिषीय समाधान

हर व्यक्ति की कुंडली अलग होती है, इसलिए सामान्य उपाय हमेशा पर्याप्त नहीं होते। व्यक्तिगत कुंडली के आधार पर उपाय और मार्गदर्शन अधिक प्रभावशाली होते हैं। Duastro की फ्री कुंडली से आप अपने ग्रहों की स्थिति जान सकते हैं और विशेषज्ञ ज्योतिषीय सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

निष्कर्ष

दूसरे विवाह में कुंडली मिलान अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विवाह की सफलता और स्थायित्व को प्रभावित करता है। ग्रहों की स्थिति, सप्तम भाव, शुक्र और मंगल के योग, राहु-केतु का प्रभाव सभी को ध्यान में रखते हुए सही समय और उपाय अपनाना चाहिए। व्यक्तिगत ज्योतिषीय मार्गदर्शन से आप अपने दूसरे विवाह को सुखमय और सफल बना सकते हैं। Duastro की फ्री कुंडली के माध्यम से अपने ग्रहों का विश्लेषण कर उचित उपाय अवश्य करें।

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